Wednesday, April 10, 2019

मनोरंजन: फर्जी ब्रेकिंग न्यूज़ वीडियो कैसे बनाएं

क्या आपने कभी अपने दोस्तों को इम्प्रेस किया है? फर्जी खबर बना कर आप अपने दोस्तों को इम्प्रेस कर सकते है। गूगल प्ले स्टोर समाचार निर्माता ऐप से भरा पड़ा है लेकिन सभी अप्प्स में एक जैसी विशेषताएं नहीं होती है जिस से आप अपने वीडियोस को प्रोफेशनल तरीके बना सकते है।

news maker android app

Boo, एंड्रॉयड एप्लिकेशन की मदद से आप फेक ब्रेकिंग न्यूज बना सकते है जिस में आप तरह तरह के फ़िल्टर इफेक्ट्स, मुख्य समाचार, और समाचार शैली का उपयोग कर सकते है। Boo App के अलावा और भी कई ऐप हैं जो आपकी एक फोटो को वायरल कर सकते हैं।

बू अप्प से न केवल फेक ब्रेकिंग न्यूज़ क्रिएट किया जाता है बल्कि ये अप्प जन्मदिन वीडियो क्लिप, वर्षगांठ वीडियो संदेश, जादुई वीडियो, और गीतात्मक वीडियो स्टेटस भी बड़ी आसानी के साथ बनाता है जिन्हें आप दोस्तों के साथ शेयर कर सकते हैं।

Download Boo - Video Status Maker

आप अपने फ़ोन के फोटोज इस अप्प में अपलोड करके अद्भुत वीडियो बना सकते है। अप्प में बहुत सरे वीडियो टेम्पलेट्स मौजूद है जिनका उपयोग विशेष वीडियोस के लिए किया जाता है।

इस अप्प की ख़ास बात ये है की पुरुषों और महिलाओं के लिए अलग अलग टेम्पलेट्स है जिस से आप अपने वीडियो को और भी खूबसूरत बना सकते है।

Boo अप्प में एक लड़की वीडियो में आती है जो फेक न्यूज़ बोलना शुरू कर देती है जिसमें वह लड़कियां और लड़के लिए विभिन्न न्यूज़ हेडलाइंस को प्रोफेशनल तरीके में न्यूज़ को पढ़ती है जैसे सच में NDTV, ABP News का एंकर समाचार को पद रहा हो।

वीडियो बनाने के बाद, आप इसका उपयोग अपने व्हाट्सएप स्टेटस और अन्य प्लेटफार्मों पर अपने संपर्कों को प्रभावित करने के लिए कर सकते हैं। जब मनोरंजन की बात आती है, तो यह ऐप आपको अपने क्षणों का आनंद लेने के लिए हर सुविधा प्रदान करता है।

फेसबुक निष्क्रिय यूजर्स को भी ट्रैक कर रहा है

फेसबुक अकाउंट डीएक्टिवेट करने के बाद आपको ट्रैक क्या किया जाता है? अगर आप सोंच रहे है की अकाउंट को बंद या डिलीट करने के बाद आपका रिश्ता फेसबुक से टूट जाता है आप आप गलत है। फेसबुक खातों को निष्क्रिय करने के बाद भी अपने उपयोगकर्ताओं को ट्रैक करता है।

facebook tracking its users

Facebook अकाउंट डीएक्टिवेट करने के बाद भी अपने उसेर्स को ट्रैक करता है जिस के जरिये वह उपयोगकर्ताओं का देता विज्ञापनदाताओं के साथ शेयर करता है। CNET की एक रिपोर्ट में बताया गया है की फेसबुक विकलांग खाते से भी उसेर्स को ट्रैक करता है।

फेसबुक ने इस बात की पुष्टि की है की विकलांग खता केवल ऑनलाइन की दुनिया में गायब रहता है लेकिन इस बात का इनकी पालिसी से कोई लेना देना नहीं है।

फेसबुक ने अपनी डाटा पालिसी में निष्क्रिय और अक्षम अकाउंट के बारे में ये नहीं कहा है की वे उपयोगकर्ता डेटा एकत्र कर रहे हैं। कई उपयोगकर्ता अपने खातों को निष्क्रिय कर देते हैं ताकि फेसबुक उन्हें ट्रैक करना बंद कर सके लेकिन अब ये बात भी क्लियर हो चुकी है की फेसबुक डाटा पालिसी का कितना उल्लंघन करता आया है।

अगर कोई यूजर अपना अकाउंट डिलीट करता है तो फेसबुक अकाउंट को 30 दिन डिलीट होने में लगते है ताकि डिलीट किये गए अकाउंट मालिक अपना विचार बदल दे। ऐसा इस लिए होता है क्यों की जब फेसबुक अकाउंट को एक बार स्थायी रूप से हटाया जाता है तो फिर देलेटेड अकाउंट को एक्टिवटे नहीं किया जा सकता है।

अगर आप अपना अकाउंट डिलीट करते है तो डिलीट होने से पहले फेसबुक आपका 30 दिन तक ट्रैक कर सकता है ताकि वे आपका डेटा उनके विज्ञापनदाताओं के साथ साझा करते है।

क्या आपका खाता निष्क्रिय होने के बाद फेसबुक वास्तव में आप पर जासूसी कर रहे हैं? अपनी टिप्पणी लिखें और हमें बताएं कि आप फेसबुक की डेटा नीति के बारे में क्या सोचते हैं।

डार्क पैटर्न को प्रतिबंधित करने के लिए प्रस्तावित बिल

Image by Gerd Altmann from Pixabay

अमेरिकी सीनेटरों ने टेक फर्मों पर "डार्क पैटर्न" डिजाइन पर प्रतिबंध लगाने के लिए एक प्रस्तावित बिल पेश किया जो उपयोगकर्ताओं को वेबसाइट के भ्रामक इंटरफ़ेस से मूर्ख बनाने से रोक देगा।

dark pattern bill

Tech प्लेटफार्म पर डार्क पैटर्न डिज़ाइन को खतम करने के लिए अमेरिकी सीनेटरों ने एक प्रस्तावित बिल पेश किया जिसका अर्थ इंटरनेट उपयोगकर्ताओं और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं को वेबसाइट और अप्प्स का बहकाने वाले डिज़ाइन से छुटकारा देना है।

अमेरिकी सीनेटर मार्क वार्नर और सीनेटर देब फिशर ने अपने ट्वीट में कहा की डार्क पैटर्न डिज़ाइन की वजा से लोग वेबसाइट पर महत्वपूर्ण कार्य करते है जो उपयोगकर्ता की सहमति के बिना होता है। डार्क पैटर्न पर प्रतिबंध लगाने के लिए मार्क वार्नर और सीनेटर देब फिशर ने DETOUR Act बिल पेश किया।

दोनों सीनेटरों द्वारा वर्णित बयान में कहा गया है की सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और अन्य टेक कम्पनीज गुमराह करने वाले डिज़ाइन से उपयोगकर्ता की सहमति के बिना लोग मेस्सगेस, कॉन्टेक्ट्स, फ्रेंड लिस्ट, एक्टिविटी, और लोकेशन जैसे ओप्तिओंस पर अनजाने में क्लिक कर देते है जिस से व्यक्तिगत डेटा को खतरा हो सकता है।

दोनों सीनेटरों द्वारा वर्णित बयान में कहा गया है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और अन्य टेक फर्म भ्रामक डिजाइनों का उपयोग करते हैं जो उपयोगकर्ताओं के व्यक्तिगत डेटा के लिए एक बड़ा खतरा हो सकता हैं। उपयोगकर्ता संदेश, कॉन्टेक्ट्स, मित्र सूची, गतिविधि, और स्थान जैसे विकल्प पर अनजाने में क्लिक कर देते है जिस से व्यक्तिगत डेटा को खतरे हो सकता है।

हालाँकि फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम, और गूगल उपयोगकर्ता डेटा को इकट्ठा करते है ताकि वह विज्ञापनों को सही स्थान और सही लोगो को टारगेट करे लेकिन जहा तक डार्क पैटर्न का सवाल है, ये एक बहकानेवाला डिज़ाइन होता है जिसको सीनेटर देब फिशर और मार्क वार्नर प्रतिबंध करने की सोच रहे है।

हैकर्स ने ताजमहल APT Framework को तैनात किया

Kaspersky Lab के सुरक्षा शोधकर्ताओं ने "ताजमहल" नामी ATP framework को डिस्कवर किया जो "सेंट्रल एशिया डिप्लोमेटिक एजेंसी" को कई साल टारगेट कर रहा था। ये मैलवेयर बहुत ही एडवांस्ड और जटिल है।

TajMahal APT Framework

Kaspersky के सुरक्षा विश्लेषण के अनुसार, TajMahal प्रोजेक्ट के पैकेज के दो भाग है जिस का नाम टोक्यो और योकोहामा है। दोनों हिस्सों में, 80 दुर्भावनापूर्ण मॉड्यूल हैं जो साबित करते हैं कि यह समय का सबसे घातक और खतरनाक मैलवेयर है।

ताजमहल तुलसेट में कई उन्नत विशेषताएं है जो इस प्रोजेक्ट के लिए आसान बैकडोर प्रदान करता है जिस से हैकर चालाकी से Keylogger, ऑडियो रिकॉर्डर, वेब कैमरा स्पायवेयर को कण्ट्रोल करने में मदद करता है।

सुरक्षा शोधकर्ता का कहना है की ओंताजमहल ATP फ्रेमवर्क एक ऐसा तुलसेट है जिस में इतने सरे दुर्भावनापूर्ण मॉड्यूल मौजूद है जो USB ड्राइव और Hard disk का डेटा बड़ी आसानी के साथ चुरा लेता है।

ताजमहल का उपयोग पिछले 5 वर्षों से हो रहा है जिसको 2013 में बनाया गया। Kaspersky Lab ने अपने ट्वीट में लिखा की ताजमहल किसी भी विशेष फ़ाइल को USB से चुरा सकता है जब USB या CD को संक्रमित कंप्यूटर में सम्मिलित किया जाता है।

बहरहाल, जिस तेजी से टेक्नोलॉजी का विकास हो रहा है, हैकर्स प्रौद्योगिकी जगत को और भी सरल तरीकों से परेशान करने में कोई कसर नहीं छोड़ते हैं।

Tuesday, April 09, 2019

फेसबुक स्मारक प्रोफाइल में कृत्रिम बुद्धि को जोड़ रहा है

Image by Thomas Ulrich from Pixabay

फेसबुक कृत्रिम बुद्धि की मदद से मृतक प्रोफाइल में नयी विशेषताएं जोड़ने में लगा है जिस से गुजर गए व्यक्ति के अकाउंट को और भी यादगार बनाया जायेगा। इस टेक्नोलॉजी की मदद से समय सीमा समाप्त प्रोफ़ाइल को जन्मदिन की विश नहीं कर सकते है।

facebook memorialized profiles updated

Facebook एल्गोरिथ्म अब तक हमें ऐसे प्रोफाइल्स को Hi, hello बोलने के लिए सुझा करता था और जैसा की आप जानते है की फेसबुक हमे मृतक प्रोफाइल को फ्रेंड रिक्वेस्ट सेंड करने को भी कह रहा था लेकिन अब ऐसा होना नामुमकिन है।

फेसबुक ने अपने एक पोस्ट में कहा है की वह इस तकनीक की मदद से मृतक प्रोफाइल पर सुझाना बंद करेंगे। फेसबुक के इस निर्णय से ये साबित होता है की कंपनी अब और कोर्ट के चक्केर लगा नहीं चाहती है।

कंपनी ने आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस की मदद से स्मारक खातों के लिए श्रद्धांजलि अनुभाग जोड़ने के वडा किया है जिस से ये अकाउंट को फेसबुक निमंत्रण, मित्र अनुरोध, जन्मदिन रिमाइंडर, और अन्य विशेषताएं
बंद हो जायेंगे।


लिगेसी कॉन्टेक्ट्स

साल 2015 में फेसबुक ने लिगेसी कॉन्टेक्ट्स इंट्रोडस किया था लेकिन फेसबुक के अनुसार ऐसे कॉन्टेक्ट्स को मैनेज करने उतना OK नहीं है जितना की अब होने वाला है। लिगेसी कॉन्टेक्ट्स में नए विशेषताएँ जोड़ने से स्मारक खातों को बड़ी आसानी के साथ मैनेज कर सकते है।

फेसबुक के डेस्क से, हम "पारित खातों" को फेसबुक के अनुशंसित स्थानों में प्रदर्शित होने से रोकने के लिए अपनी कृत्रिम बुद्धि में सुधार कर रहे हैं।

चीन क्रिप्टोकरेंसी माइनिंग पर प्रतिबंध लगाने जा रहा है

Image by mohamed Hassan from Pixabay

भारत के बाद अब चीन भी क्रिप्टोकरेंसी माइनिंग पर प्रतिबंध लगाने जा रहा है। इंडिया पहले से ही क्रिप्टोकरेंसी के व्यापार पर प्रतिबंध लगा चूका है लेकिन अब चीन  भी ऐसा ही कदम उठाने जा रहा है।

china's cryptocurrency mining

China का राष्ट्रीय विकास और सुधार आयोग (NDRC) ने क्रिप्टोकरेंसी माइनिंग पर प्रतिबंध लगाने के लिए एक प्रस्ताव जारी की है जिस पर जनता अपने विचार और कमेंट करके अपनी राय दे सकते है। चीन की सफलता, क्या उनकी कार्रवाई से चीन की अर्थव्यवस्था में कोई सुधार आएगा?

क्रिप्टोकरेंसी माइनिंग पर प्रतिबंध लगाने का चीन का फैसला चीन में रहने वाले बिटकॉइन व्यापारियों को बुरी तरह से प्रभावित कर सकता है लेकिन साथ ही इस निर्णय से चीन की चीन की अर्थव्यवस्था सही हो जाएगी ऐसा नेशनल डेवलपमेंट एंड रिफॉर्म्स कमीशन का कहना है।

चीन ने ये निर्णय इस लिए लिया है क्यूंकि उनका मन्ना है की क्रिप्टोकरेंसी माइनिंग केवल समय बर्बाद करना है जिस से कोई चीन को कोई लाभ नहीं मिल रहा है। हालाँकि चीन का कहना सही है क्यूंकि Cryptocurrency Mining में जबरदस्त मात्रा में ऊर्जा का उपयोग होता है।

अब देखना ये है की चीन की ये योजना किस हद तक फायदेमंद रहेगा। अगर फायदेमंद रहा तो भविष्य में दूसरे देश भी ऐसा ही करेंगे और धीरे धीरे क्रिप्टोकरेंसी इस ग्रह से ही गायब हो जाएगी।

Monday, April 08, 2019

ट्विटर ने फॉलोवर्स की संख्या 1000 से घटाकर 400 कर दी

जैसा की आप जानते है की ट्विटर के अलावा, सभी वेब्सीटेस सपम्स से बचने के लिए आये दिन कुछ न कुछ इम्प्रूवमेंट करते है और ट्विटर ने भी कुछ ऐसा ही। ट्विटर अकाउंट पर डेली फोल्लोवेर्स की लिमिट 1000 थी लेकिन अब इसको केवल 400 कर दिया।

twitter reduced number of follower to 400

Twitter ने अपने एक ट्वीट में कहा है की स्पैम और ऑटो बोत फोल्लोवेर्स से लड़ने के लिए 1000 फोल्लोवेर्स को 400 में कर दिया। इसके मतलब ये है की ट्विटर यूजर चौबीस घंटे में एक अकाउंट से 1000 एकाउंट्स को फॉलो कर सकता है लेकिन अब इसको घटा कर केवल 400 कर दिया गया है।

ट्विटर के इस निर्णय से ट्विटर स्पैमर्स को एक बड़ा झटका लगा होगा क्यों लोग बोट्स की मदद से अपने अकाउंट पर फोल्लोवेर बढ़ाते थे। इस निर्णय से न ही आपको 400 से ज्यादा फोल्लोवेर्स फॉलो करेंगे और न ही आप के अकाउंट से 400 से ज्यादा अकाउंट को फॉलो किया जा सकता है।

ट्विटर ने अपने ट्वीट में ये भी कहा है की इस फैसले से ट्विटर उपयोगकर्ताओं को कोई परेशानी नहीं होगी बल्कि इस पालिसी से बोट्स और स्पैमर्स को स्पैम फैलाने से काफी हद तक रोका जा सकता है।

अब देखना ये है की ट्विटर की नयी नीति से मिक्रोब्लॉग्गिंग प्लेटफार्म "ट्विटर" में किस हद तक सुधर आ सकता है। जहा तक असली एकाउंट्स का सवाल है, ये पॉलिसी रियल लोगो को प्रभावित नहीं करेगी।

अमेज़न हाई-स्पीड उपग्रह इंटरनेट प्रदान करेगा

दुनिया की सबसे बड़ी डिजिटल कंपनी और टेक्नोलॉजी से अमेज़न अब 3,236 उपग्रहों को प्रक्षेपित करेंगे जिस के जरिये दुनिया भर के लोग हाई स्पीड इंटरनेट चला सकते है।

amazon's project kuiper

Amazon ने इस प्रोजेक्ट का नाम "प्रोजेक्ट कुइपर" रखा है जिस की पुष्टि अमेज़न के संस्थापक जेफ बेजोस ने की है। हालाँकि ये प्रोजेक्ट अभी शुरू हुआ है लेकिन इसके पूरा होने के बाद सुनसान क्षेत्र में रहने वाले लोग इस परियोजना का लाभ उठा सकते है।

सबसे बड़ी ईकॉमर्स कंपनी अमेज़न दुनिया के हर कोने तक 3,236 उपग्रहों को कक्षा में छोड़ने की कोशिश कर रही है।

अमेज़न के परियोजना से ऐसे लोग इंटरनेट का लाभ उठा सकते है जिनके पास अभी तक इंटरनेट एक्सेस नहीं है।

अमेज़न की टेक्नोलॉजी 3,236 उपग्रह को ऑर्बिट में रख कर हाई स्पीड इंटरनेट प्रदान करेगा। हालाँकि इस प्रोजेक्ट के बारे में जेफ बेजोस ने खुल कर नहीं बताया है लेकिन इस को पूरा करने के लिए कंपनी काम कर रही है।

प्रोजेक्ट कुइपर को संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी इंटरनेशनल टेलीकम्यूनिकेशन यूनियन के तहत पूरा किया जायेगा। अमेज़न के इस नयी प्लानिंग के साथ सभी लोग स्लो इंटरनेट को गुडबाय कहेंगे।

फेसबुक सबसे बड़ा वर्चुअल कब्रिस्तान बन जाएगा

2098 के अंत तक फेसबुक दुनिया का सबसे बड़ा आभासी कब्रिस्तान होगा। क्या आपको मेरी बात मजाज़ लग रही है? दुनिया में लगभग ऐसा कोई भी व्यक्ति नहीं होगा जिसके पास फेसबुक अकाउंट न हो। केवल नार्थ अमेरिका में 74.4%+ फेसबुक उपयोगकर्ता है।

facebook world's biggest virtual graveyard

Facebook पर हर कोई किसी न किसी कारन अपना अकाउंट बना लेता है और एहि वजा है की फेसबुक दुनिया की सबसे पॉपुलर और व्यापक रूप से इस्तेमाल की जाने वाली वेबसाइट है जिस के बारे में कोई भी रिपोर्ट गलत साबित हो सकती है।


फेसबुक उपयोगकर्ताओं की कुल संख्या

फेसबुक उपयोगकर्ताओं की कुल संख्या 2.32 बिलियन नहीं है बल्कि ये मासिक सक्रिय उपयोगकर्ता है जिसकी सही रिपोर्ट statista.com पर पढ़ी जा सकती है। लेकिन फेसबुक पर ऐसे भी बहुत अकाउंट है जिस को चलने वाले अब इस दुनिया में नहीं है।


दुनिया का सबसे बड़ा आभासी कब्रिस्तान

वर्ष 2012 में किए गए एक अध्ययन के अनुसार, 2008 से 2012 तक, 30 मिलियन मृतक फेसबुक उपयोगकर्ता खाते थे। यह आश्चर्य की बात है कि 8,000 फेसबुक उपयोगकर्ता रोजाना मर जाते हैं। यह वास्तविक समझ में आता है कि इस सदी के अंत तक, फेसबुक दुनिया का सबसे बड़ा आभासी कब्रिस्तान बन जाएगा क्योंकि इस लोकप्रिय मंच के अधिक मृतक प्रोफाइल होंगे।

जहा तक मेरा अंदाज़ा है, फेसबुक न केवल वर्चुअल कब्रस्तान बन जायेगा बल्कि अभी के समय में दुनिया का सबसे ज्यादा डेड यूजर अकाउंट केवल फेसबुक पर है। पयोगकर्ता खाते बढ़ने के साथ साथ बहुत तेजी से काम होते जा रहे है।

एहि वजा है की साल 2098 के अंत में फेसबुक एक ऐसी वेबसाइट बन जाएगी जहा पर मृतक लोगो की सबसे ज्यादा संख्या होगी। अगर आप इस स्टडी के बारे में कुछ कहना चाहते है तो कृपया कमैंट्स में लिखे।

© Copyright 2019 TechLekhak | All Right Reserved